चंद्रमा का ऐतिहासिक चक्कर लगाकर लौटे आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्री अपने साथ 7,000 से ज्यादा शानदार तस्वीरें लेकर पृथ्वी पर लौटे हैं। इस मिशन को खास बनाने में जिस तकनीक ने अहम भूमिका निभाई, वह था कपोला मॉड्यूल, जिसने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा और पृथ्वी के अद्भुत नजारे दिखाए।
करीब 10 दिनों की इस यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के पास से गुजरते हुए उसकी सतह, गड्ढों, लावा प्रवाह और अंतरिक्ष के दुर्लभ दृश्यों को कैमरे में कैद किया। अर्थराइज और अर्थसेट जैसे दृश्य, सूर्य ग्रहण और मिल्की वे गैलेक्सी के नजारे भी इसी मॉड्यूल के जरिए देखे और रिकॉर्ड किए गए।
क्या है कपोला मॉड्यूल?
कपोला दरअसल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे अंतरिक्ष में बाहर के दृश्यों को देखने और मॉनिटरिंग के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें कुल सात खिड़कियां होती हैं, छह किनारों पर और एक नीचे की ओर जो अंतरिक्ष का पैनोरमिक व्यू देती हैं।
इन खिड़कियों पर विशेष शटर लगे होते हैं, जो उन्हें अंतरिक्ष मलबे और सूक्ष्म उल्कापिंडों से सुरक्षित रखते हैं। यही वजह है कि अंतरिक्ष यात्री यहां से सुरक्षित रहते हुए शानदार तस्वीरें ले पाते हैं।
सिर्फ नजारा नहीं, तकनीकी काम भी
कपोला सिर्फ दृश्य देखने के लिए ही नहीं, बल्कि तकनीकी कामों के लिए भी अहम है। इसमें रोबोटिक वर्कस्टेशन लगा होता है, जिसकी मदद से अंतरिक्ष यात्री रोबोटिक आर्म को नियंत्रित करते हैं। इसके जरिए अंतरिक्ष यानों को जोड़ना, पकड़ना और स्पेस स्टेशन के बाहर के कार्य करना संभव होता है।
क्यों खास है यह मॉड्यूल?
कपोला को अंतरिक्ष यात्रियों का सबसे पसंदीदा हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यहां से पृथ्वी एक विशाल खिड़की की तरह दिखाई देती है। यही मॉड्यूल अंतरिक्ष मिशनों को सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, बल्कि अनुभव के स्तर पर भी यादगार बनाता है।
आर्टेमिस-II मिशन में इस मॉड्यूल की मदद से ली गई हजारों तस्वीरें न सिर्फ वैज्ञानिक शोध में मदद करेंगी, बल्कि अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने की दिशा में भी एक बड़ा योगदान साबित होंगी।
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