सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने वरिष्ठ वकील वी मोहना समेत चार हाईकोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने की सिफारिश की थी। जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है और इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसके साथ ही अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 22 और 27 मई की बैठकों के बाद ये सिफारिशें की थीं। अब जैसे ही केंद्र सरकार ने इन नामों को मंजूर किया है तो जस्टिस वी मोहना ने इतिहास रच दिया है।
कौन हैं जस्टिस वी मोहना
जस्टिस वी मोहना, जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद देश की दूसरी महिला वकील हैं, जिन्हें वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज नियुक्त किया गया है। इतना ही नहीं जस्टिस वी मोहना सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला जज हैं। वर्तमान में जस्टिस बीवी नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट में जज हैं और वी मोहना दूसरी महिला जज होंगी।
जस्टिस मोहना, भारत के पहले पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स की छात्रा हैं, जिसकी देश में शुरुआत पहली बार साल 1983 में हुई थी। उन्होंने कोयंबटूर लॉ कॉलेज से वकालत की डिग्री हासिल की थी। एक इंटरव्यू के दौरान जस्टिस वी मोहना ने बताया था कि वे अपने परिवार की पहली वकील हैं और अपनी मां की प्रेरणा से उन्होंने वकालत की पढ़ाई की। जस्टिस मोहना को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट की जज नियुक्त किया गया है, जिसके चलते उनका कार्यकाल पांच साल का होगा। ऐसे में जस्टिस मोहना लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में सेवाएं दे सकेंगी और 2031 में रिटायर होंगी।
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कई हाई प्रोफाइल मामलों में कर चुकी हैं बहस
जस्टिस वी मोहना का जन्म 27 जून 1966 को हुआ था। उन्होंने वरिष्ठ वकील सी एस विद्यानाथन के मार्गदर्शन में वकालत की ट्रेनिंग ली और साल 1996 में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बनीं। साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया। जस्टिस वी मोहना ने सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन, वरिष्ठ नागरिकों को संपत्ति का अधिकार और कर्नाटक हिजाब जैसे मामलों में पैरवी की थी।
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