भारत में बीते कुछ वर्षो में पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की दर तेजी से बढ़ी है। पहले प्योर पेट्रोल यानी ईंधन में बिना किसी और तरल पदार्थ के मिलावट वाला पेट्रोल दशकों तक इस्तेमाल में रहा। हालांकि, भारत में अलग-अलग सरकारों के दौर में इथेनॉल ब्लेंडिंग पहले ई-10 और फिर मोदी सरकार के दौर में ई-20 तक जा पहुंची। अब केंद्र सरकार इस इथेनॉल ब्लेंडिंग को और बढ़ाने की तैयारी में है। गुरुवार को केंद्र सरकार के एक फैसले ने इसके संकेत मजबूत कर दिए। दरअसल, सरकार ने ई-20 से ऊपर वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को खत्म कर दिया है, वह भी तब जब भारत में ई-20 से ऊपर का पेट्रोल चलन में नहीं है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलनाने का इतिहास क्या रहा है? मौजूदा समय में किस हद तक इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल को चलन में लाया गया है? केंद्र सरकार के ई-20 से ऊपर वाले पेट्रोल से एक्साइज ड्यूटी हटाने के फैसले के क्या मायने हैं? ई-20 और इससे ऊपर इथेनॉल की मात्रा वाले पेट्रोल में कितना फर्क है? भारत में इस वक्त जो वाहन इस्तेमाल में हैं, वे पेट्रोल में कितने इथेनॉल के साथ चलने में कारगर हैं? आइये जानते हैं…