पिता का कैंसर से लंबा संघर्ष
रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह पिछले कुछ समय से लीवर कैंसर से जूझ रहे थे। उनकी हालत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और लगातार रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी दी गई। बीमारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी और तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
कौन थे खानचंद्र सिंह?
खानचंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। उन्होंने वर्षों तक कड़ी मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने रिंकू के क्रिकेट सपने को कभी टूटने नहीं दिया। आज रिंकू सिंह जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके पिता का बड़ा योगदान रहा है।
पिता की तबीयत बिगड़ने पर घर लौटे रिंकू
जब पिता की हालत गंभीर हुई तो रिंकू सिंह भारतीय टीम का साथ छोड़कर तुरंत घर पहुंचे। उस समय टीम चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले की तैयारी कर रही थी। हालांकि, पिता से मुलाकात के बाद रिंकू दोबारा टीम से जुड़ने के लिए चेन्नई लौट आए थे। हालांकि, अब वह दाह संस्कार कार्यक्रमों के लिए फिर टीम से दूर हो सकते हैं।
टीम संयोजन पर पड़ा असर
रिंकू सिंह की अनुपस्थिति का असर टीम संयोजन पर भी दिखा। जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया और संजू सैमसन को ओपनर के रूप में मौका दिया गया। हालांकि, दूसरी पारी के दौरान रिंकू को सूर्यकुमार यादव के स्थान पर सब्स्टीट्यूट फील्डर के रूप में मैदान पर देखा गया। ऐसे में आगे भी भारतीय टीम सैमसन वाले कॉम्बिनेशन के साथ ही मैदान पर उतर सकती है और रिंकू को परिवार के साथ यह दुख की घड़ी बिताने का समय दिया जा सकता है।
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